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कविताः उसके दो नैना

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कविताः उसके प्यारे दो नैना   उसके दो नैना एक दूजे के दिवाने बने बैठे है  एक साथ तकते है झपकते है उसके दो नैना एक दूजे के दिवाने बने बैठे है फिक्र को पलकों पर बैठाये बोझ लिये सपनों का अजीब सी, हैरानी भरी निगाहों से हर पल  एक दूजे को अपना प्यार जताते है उसके दो नैना उसके दो नैना एक दूजे के दिवाने बने बैठे है  पर कभी एक दूजे को देख न पाते है एक साथ तकते है झपकते है  उसके दो नैना एक दूजे के दिवाने बने बैठे है।